Shers

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  1. चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
    मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
  2. लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
    बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती
  3. अब भी चलती है जब आँधी कभी ग़म की ‘राना’
    माँ की ममता मुझे बाहों में छुपा लेती है
  4. किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
    मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई
  5. इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
    माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है
  6. मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
    माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ
  7. ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे
    माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे
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